कला-साहित्य
समय और ज़िन्दगी
युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क
न वक्त ठहरता है न ज़िन्दगी रुकती है
ज़िन्दगी समय से हमेशा मात खाती है
टकराव होता रहता है दोनों में अक्सर
समय जीत जाता है ज़िन्दगी हार जाती है
कारवां दोनों का चलता रहता है
दोनों आगे ही बढ़ते जाते हैं
समय तो बिना रुकावट चलता जाता है
ज़िन्दगी के रास्ते में कांटे बहुत आते हैं
ज़िन्दगी कभी रोती है कभी गुनगुनाती है
कभी चलते चलते थक कर बैठ जाती है
कभी खामोश राहों से गुजरती है
कभी याद कर गुज़रे पलों को मुस्कुराती है
समय का चक्र कुछ ऎसा चलता है
ज़िन्दगी समय का मुकाबला नहीं कर पाती है
बचपन जवानी तो कट जाती है हँसते मुस्कुराते
बुढ़ापा देख कर बहुत घबराती है
रवींद्र कुमार शर्मा
घुमारवीं
जिला बिलासपुर हि प्र




