कला-साहित्य

जंगल उदास है

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

कम हो रहा है लगातार

वृक्षों का हरापन ,

कविताएं उदास हैं !!

कम हो रही हैं लगातार

कविताओं की पंक्तियां ,

चिड़ियां उदास हैं !!

कम हो रही हैं लगातार

वो पहली सी बारिशें ,

कागज़ की नावें उदास हैं !!

कम हो रहा है लगातार

प्रेम में हमारा मिलना ,

समूचा जंगल उदास है !!

नमिता गुप्ता “मनसी”

मेरठ, उत्तर प्रदेश

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