कला-साहित्य

न पूछो वतन

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

हाल क्या है दिलों का

न पूछो वतन

शांति पाने का किया

क्या क्या जतन।।

मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा

गिरजाघर है बंद

घर में ही करें प्रार्थना

सबके लिए है कामना।।

कभी तो योगा करते

कभी हैँ नकली हँसते

भविष्य की चिंता बड़ी

समस्या ना ईश्वर से बड़ी।।

कभी काढ़ा हैँ पीते

हम हैं उम्मीद पर जीते

दूसरों को देते हैं शिक्षा

रोज सबसे लेते शिक्षा।।

गृह कार्य का क्रम बिगड़ा

घड़ी से जैसे हुआ झगड़ा

देर सबेर होते हैं काम

बस लेते हैं प्रभु का नाम।।

सोशल मीडिया बनी सहारा

चंद बातों को होते बहरा

मनोरंजन का मन नहीं होता

जब मानवीय दर्द है होता।।

स्वच्छता दूरी की बड़ी सनक

दिखती नहीं कहीं चहल पहल

चोरी से लोग लेते हैँ टहल

दुआ है सबके लिए हर पहल।।

सड़कों पर हुआ सन्नाटा

वातावरण बदला बदला

बेमौसम होती बरसात

पेड़ पौधे ले रहे हैं सांस।।

मानवीयता ने चाहे हंसाया

अमानवीयता ने नीचा दिखाया

कालाबाजारी ने दिल दुखाया

कितनों के दर्द ने है रुलाया।।

चाहे वैसे कहीं भी न जाएं

पर लॉकडाउन में बड़ा सताए

कितने काम हुए हैं प्रभावित

बस हम हैं ईश्वर पर आश्रित।।

थोड़ा समझदार बन जाएं

कुछ खुद पर हंसा जाए

जीवन में सकारात्मकता आए

हाल राधे राधे राधे हो जाए।।

हाल क्या है दिलों का

न पूछो वतन

शांति पाने का किया

क्या क्या जतन।।

पूनम पाठक बदायूँ

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button