कला-साहित्य

फेल नहीं सेल

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

शेखर ने राजेश को आवाज़ लगाई – अरे राजेश?! बताओ तुम्हारी कितनी किडनी है?

राजेश ने बड़े दुखी स्वर में कहा- एक।

फिर शेखर ने रवि को आवाज़ लगाई – अरे रवि! बताओ तुम्हारी कितनी किडनी है?

रवि ने भी दुखी स्वर में कहा – एक।

अंत में शेखर ने सलीम को आवाज़ लगाई – अरे सलीम! यहाँ आओ और बताओ कि तुम्हारी कितनी किडनी है?

सलीम ने रोते हुए कहा – एक।

शेखर इस तरह एक-एक को बुलाकर सबकी किडनियों के बारे में पूछना मुकेश को हैरान करने वाला था। उसने कौतूहलतावश शेखर से पूछ लिया – क्या इन सबकी एक किडनी फेल हो गई है?

इस पर शेखर मुस्कुराते हुए कहने लगा – फेल नहीं सेल हुई है। थी तो इन सबकी दो-दो किडनियाँ। किंतु घर वालों की फरमाईशों को पूरा करने के चक्कर में एक-एक किडनी बेचनी पड़ी। यहाँ अकेले कमाने वाले पर सभी पिल पड़ते हैं। कमाता एक है खाते अनेक हैं। ऐसे में किडनी नहीं बिकेगी तो और क्या होगा।

तभी राजु वहाँ से गुजर रहा था। उसकी एक आँख पर पट्टी बँधी थी। पूछने पर पता चला कि घरवालों ने प्लाज्मा टी.वी. की माँग की थी। माँग को पूरा करने के लिए आँख बेचनी पड़ी।

मुकेश इन सबके बावजूद घरवालों की माँग पूरी करने की ज़िद पर अड़ा रहा। उसने कहा – मुझे घरवालों की माँग पूरा करने के लिए दिल-गुर्दा फिर चाहे पूरा बदन ही क्यों न बेचना पड़े, मैं पीछे नहीं हटूँगा।

अगले दिन वह पत्नी के लिए अँगूठी ले आया। सोचा पत्नी खुश होगी। तारीफ के दो बोल बोलेगी। किंतु उसके किए-कराए पर तब पानी फिर गया जब पत्नी ने कहा कि इस दो कौड़ी की अँगूठी से क्या होगा? मुझे तो नौलखा हार चाहिए।

इस पर मुकेश बाल नोचने लगा। अगले दिन अंग बेचने अस्पताल जा पहुँचा।

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’, मो. नं. 73 8657 8657

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