कला-साहित्य

आज योग, कल अयोग्य

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

भर-भर स्याही कलम चलाने वाले

आज सभी उपदेश योग पर दे जाएंगे।।

कल ये देर तक बिस्तर में पाए जाएंगे।।

विडियो साझा कर योग का रूतबा जमाएंगे

कल ये ही योग को अयोग्य कर पाए जाएंगे।।

सुनो ये कुछ नया नहीं देश मे मेरे यारों

देखा देखी कर नकल सभी कर जाएंगे।।

कुछ कर विशेष दिन वाहवाही लूटने वाले ये

दूजे विशेष दिन के इंतजार मे नज़र आएंगे।।

आया दूजा जो कोई विशेष दिन करीब तो ये

दो-तीन दिन पूर्व, उत्साह मिल मंच पर जताएंगे।।

बीत गया जब कोई विशेष दिन भूल उसको

साधारण अवस्था मे आ आराम फरमाएंगे।।

इनसे बड़ा कोई ज्ञानी महारथी नहीं कोई भी

कलम का जादू बिखेर लिख ऐसा जताएंगे।।

अरे इंसानी फितरत है ये कोई नई बात नहीं

सम्मान पत्र की चाह मे योग विडियो बनाएंगे।।

पटलों पर कर साझा खुद को महान बताएंगे।।

वीना की बात में दम है यारों पढ़

यही सोच मन ही मन मुस्कुराएंगे।।

भर-भर स्याही कलम चलाने वाले

आज सभी उपदेश योग पर दे जाएंगे।।

वीना आडवाणी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र

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