कला-साहित्य

सबके अपने काम

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

जुगनू को मुस्कुराते देखा

मैंने तिमिर के आंचल में,

जलद लहरियों की बूंदों को

देखा नीर के बादल में,

प्रखर सूर्य की किरणें भी

अंगड़ाई धरती पर लेती,

फूट रही कोयल की वाणी

संगीत को वह सरगम देती,

गीत सुनाता भंवरा गुन गुन,

कली- कली के कानों में

रस बरसाता वह सुन – सुन,

अपने-अपने काम है सबके

सबकी अपनी मस्ती है,

दूर कहीं पर चिंतन करती

मेरी भी अपनी कश्ती है।।

कवयित्री – अंजनी द्विवेदी ,(काव्या )नवीन फल मंडी,
अगस्त पार, जिला देवरिया ,उत्तर प्रदेश

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